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Showing posts from May, 2020

उनचास मरुत का क्या अर्थ है ? | वायु कितने प्रकार की होती है?

Unchaas Marut | उनचास मरुत तुलसीदास ने सुन्दर कांड में, जब हनुमान जी ने लंका मे आग लगाई थी, उस प्रसंग पर लिखा है -* *हरि प्रेरित तेहि अवसर चले मरुत उनचास।* *अट्टहास करि गर्जा कपि बढ़ि लाग अकास।।25।।* अर्थात : जब हनुमान जी ने लंका को अग्नि के हवाले कर दिया तो -- *भगवान की प्रेरणा से उनपचासों पवन चलने लगे।* *हनुमान जी अट्टहास करके गर्जे और आकार बढ़ाकर आकाश से जा लगे। 49 प्रकार की वायु के बारे में जानकारी और अध्ययन करने पर सनातन धर्म पर अत्यंत गर्व हुआ। तुलसीदासजी के वायु ज्ञान पर सुखद आश्चर्य हुआ, जिससे शायद आधुनिक मौसम विज्ञान भी अनभिज्ञ है । आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि *वेदों में वायु की 7 शाखाओं के बारे में विस्तार से वर्णन मिलता है*। अधिकतर लोग यही समझते हैं कि वायु तो एक ही प्रकार की होती है, लेकिन उसका रूप बदलता रहता है, जैसे कि ठंडी वायु, गर्म वायु और समान वायु, लेकिन ऐसा नहीं है।  दरअसल, जल के भीतर जो वायु है उसका वेद-पुराणों में अलग नाम दिया गया है और आकाश में स्थित जो वायु है उसका नाम अलग है। अंतरिक्ष में जो वायु है उसका नाम अलग और पाताल में स्थित वायु का नाम अलग है। नाम अल

आनंद पर सबका अधिकार - स्वामी परमानंद जी महाराज | Anand par sabka adhikar -Swami Parmanand Ji Maharaj

संसार के प्रत्येक प्राणी को आनंद में रहने का पूर्ण अधिकार है तो सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आनंद में कोई भी प्राणी किस प्रकार रह सकता है ?क्योंकि हर प्राणी के हृदय में हर समय किसी ना किसी बात की चिंता , उद्योग,विकार जन्म लिए रहते हैं और इन्हीं समस्याओं में उलझा हुआ इंसान कभी अपने आप को आनंद प्रदान नहीं कर पाता।  आनंद पर सबका अधिकार - स्वामी परमानंद जी महाराज Swami Parmanand Ji Maharaj  अपने वेदांत प्रवचनों में हमे बताते है की हमारे सनातन धर्म में हमारे ऋषि-मुनियों ने परमानंद को प्राप्त करने के लिए जो साधन बताया वह अत्यंत ही सहज और सुलभ है। संसार का कोई भी प्राणी जो परम आनंद की प्राप्ति करना चाहता है, जो सदा रहने वाले आनंद को प्राप्त करना चाहता है उसे संसार के किसी भी वस्तु से लगाव नहीं रखना चाहिए अर्थात वह संसार में रहे परंतु उसमें लिप्त ना हो। संसार में रहते हुए भी सन्यासी की तरह अपने जीवन को जिए।  हम सब का सुख और दुःख स्वयं हमारे ही हाथ होता है। कोई दूसरा हमे कभी कोई सुख या दुःख नहीं दे सकता क्योकि किसी में छमता ही नहीं है की कोई किसिस को सुख ा दुःख दे सके।  जरा सोचिये